छवि: Livelaw Indiaचुनावी पर्यवेक्षण कब चुनावी कानून बनाना बन जाता है? अनुच्छेद 327 के घटते दायरे पर एक विश्लेषण
• सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में चुनाव आयोग के स्पेशल इंटेंसिव रिवीज़न (SIR) को बरकरार रखा, जिससे मतदाताओं को मताधिकार से वंचित किए जाने की संभावना पर बहस छिड़ गई है। • यह फैसला अनुच्छेद 324, जो आयोग को पर्यवेक्षी शक्तियाँ प्रदान करता है, और अनुच्छेद 327 एवं 328, जो चुनावी नियम बनाने का अधिकार विधायी प्रक्रिया के लिए सुरक्षित रखते हैं, के बीच एक संवैधानिक तनाव को उजागर करता है। • यह निर्णय महत्वपूर्ण है क्योंकि यह चुनाव आयोग के अधिकार क्षेत्र के विस्तार की एक न्यायिक प्रवृत्ति की ओर संकेत करता है, जिससे प्रशासनिक पर्यवेक्षण और विधायी कानून बनाने के बीच की रेखा धुंधली हो सकती है।
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