छवि: Foreign Policyभारतीय लोकतंत्र और मोदी की सफलता को पश्चिम ने गलत समझा
• लेख का तर्क है कि पश्चिमी दृष्टिकोण ने भारतीय लोकतंत्र की स्थिति को गलत तरीके से समझा है, यह सुझाव देते हुए कि भले ही भारत कम उदार (liberal) हो गया हो, फिर भी यह मौलिक रूप से लोकतांत्रिक बना हुआ है। • इस बदलाव को दक्षिणपंथी राजनीति की ओर एक वैश्विक प्रवृत्ति के हिस्से के रूप में देखा गया है, जो केरल में कम्युनिस्ट शासन की गिरावट और नेपाल जैसे देशों में युवा-नेतृत्व वाले आंदोलनों के उदय को दर्शाता है। • यह विश्लेषण एक व्यापक पैटर्न पर प्रकाश डालता है जहाँ पारंपरिक मुख्यधारा के राजनीतिक दलों को नए, लोकलुभावन (populist) आंदोलनों द्वारा किनारे किया जा रहा है।
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