जीवनभर रहने वाली बीमारियों से ग्रस्त दिव्यांग लोग 'अनावश्यक' Pip पुनर्मूल्यांकन का सामना कर रहे हैं
चैरिटी का कहना है कि 'निरर्थक' समीक्षाएं सार्वजनिक धन की बर्बादी कर रही हैं और दावेदारों के मानसिक स्वास्थ्य को 'महत्वपूर्ण रूप से नुकसान' पहुंचा रही हैं। नए विश्लेषण से पता चलता है कि जीवनभर रहने वाली बीमारियों से ग्रस्त दिव्यांग लोगों को आधिकारिक दिशा-निर्देशों के विपरीत, बार-बार "निरर्थक" लाभ पुनर्मूल्यांकन (benefit reassessments) से गुजरना पड़ रहा है। गरीबी-विरोधी चैरिटी Z2K के एक अध्ययन में पाया गया है कि लाखों दिव्यांग लोग "अनावश्यक" व्यक्तिगत स्वतंत्रता भुगतान (Pip) समीक्षाओं से गुजर रहे हैं, जिससे सार्वजनिक धन की "बर्बादी" हो रही है और दावेदारों के मानसिक एवं शारीरिक स्वास्थ्य को "महत्वपूर्ण नुकसान" पहुँच रहा है। पढ़ना जारी रखें...
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