वैज्ञानिकों का दावा: गट माइक्रोबायोम से पार्किंसंस के जोखिम का पता लगाया जा सकता है
• अध्ययन से पता चलता है कि आनुवंशिक जोखिम वाले लोगों में विशिष्ट परिवर्तन अधिक स्पष्ट होते हैं, जिससे नई उपचार पद्धतियों की उम्मीद बढ़ गई है। • शोध के अनुसार, पेट (गट) में रहने वाले सूक्ष्मजीवों में होने वाले बदलाव उन लोगों की पहचान कर सकते हैं जिनमें पार्किंसंस रोग का जोखिम अधिक है, और यह पहचान लक्षणों के विकसित होने से बहुत पहले की जा सकती है। • शोधकर्ताओं ने गट माइक्रोबायोम में कुछ विशिष्ट परिवर्तनों की खोज की है जो पार्किंसंस के आनुवंशिक जोखिम वाले लोगों में अधिक स्पष्ट हैं और इस बीमारी से ग्रसित लोगों में और भी अधिक गहरे हैं। आगे पढ़ते रहें...
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